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संस्थान में राजभाषा हिंदी

भारतीय विदेश व्‍यापार संस्‍थान (मानित विश्‍वविद्यालय) वाणिज्‍य मंत्रालय, भारत सरकार  के अंतर्गत एक स्‍वायत्‍तशासी संस्‍था है ।  संस्‍थान की स्‍थापना वर्ष 1963 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहल पर विदेश व्‍यापार को ध्‍यान में रखते हुए की गई थी । संस्थान अपने मूल उद्देश्य शिक्षण, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की ही भांति संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के प्रति पूरी तरह सचेत और जागरूक है । कार्यालयीन कामकाज में अधिक से अधिक राजभाषा हिंदी का प्रयोग किया जाता है । संस्‍थान को माननीय राष्‍ट्रपति महोदय द्वारा 'क' क्षेत्र में राजभाषा नीतियों के श्रेष्‍ठ कार्यान्‍वयन के लिए वर्ष 2015-16 का 'राजभाषा कीर्ति पुरस्‍कार' द्वितीय तथा लगातार तीन बार वर्ष 2010-11, 2011-12  व 2012-13 के लिए 'इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्‍कार' तृतीय प्रदान किए गए  हैं। इसके अतिरिक्‍त, वाणिज्‍य मंत्रालय की ओर से संस्‍थान को 'क' क्षेत्र में राजभाषा के श्रेष्‍ठ कार्यों के लिए माननीय राज्‍य मंत्री सिंधिया द्वारा वर्ष 2010-11 का प्रथम पुरस्‍कार प्रदान किया गया ।  उपर्युक्‍त पुरस्‍कार संस्‍थान में राजभाषा के प्रति हमारी कटिबद्धता को दर्शाते हैं।

राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार को ध्‍यान में रखते हुए संस्थान में समय-समय पर प्रबंधन विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत देश के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले सहभागिायों को हिंदी माध्‍यम से प्रशिक्षण दिया जाता है तथा प्रशिक्षण संबंधी सामग्री भी हिंदी में उपलब्‍ध कराने का प्रयास किया जाता है । हिंदी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला में विभिन्नि राज्यों  से आए आईटीआई प्रिंसिपल तथा रोजगार केन्द्र के अधिकारियों को क्षमता विकास निमार्ण विषय पर शिक्षण/प्रशिक्षण पूर्ण रूप से हिंदी माध्यम से दिया गया । 
संस्थान के सभी अनुभागों/विभागों में प्राप्त हिंदी पत्रों का उत्तर हिंदी में ही दिए जाने के अतिरिक्त ”क” और ”ख” क्षेत्र में अधिक से अधिक पत्राचार हिंदी में किया जा रहा है । इस प्रकार संस्थान में हिंदी पत्राचार की स्थिति पूर्णतया संतोषजनक है ।  हम संस्‍थान में पूरी तरह राजभाषा के क्रियान्‍वयन के लिए  प्रयासरत हैं।

 

संस्‍थान मे राजभाषा हिंदी के प्रगामी-प्रयोग से संबंधित गतिविधियां का विवरण निम्न प्रकार है:-

  • राजभाषा नियम व अधिनियम
  • द्विभाषी वेबसाईट
  • प्रोत्‍साहन योजना
  • हिंदी कार्यशालाएं
  • तिमाही एवं वार्षिक रिपोर्ट
  • तिमाही बैठकें
  • नराकास की बैठकें
  • सलाहकार समिति की बैठकें
  • सेवाकालीन प्रशिक्षण
  • हिंदी में प्रकाशन
  • राजभाषा निरीक्षण
  • हिंदी सप्‍ताह
  • दीर्घा
  • संपर्क करें

राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3)  
संस्थान में राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत सभी कार्यालय आदेश, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचनाएं, टेंडर,  करार आदि द्विभाषी रूप में जारी किए जाते हैं।  इसके अतिरिक्‍त  संसद के एक सदन या दोनों सदनों में प्रस्‍तुत किए जाने वाले सरकारी कागज-पत्र, संसद के एक सदन में या दोनों में पस्‍तुत की जाने वाली प्रशासनिक औन अन्‍य रिपोर्ट, अपने से उच्‍चतर कार्यालयों को भेजी जाने वाली प्रशासनिक या अन्‍य रिपोर्ट पूर्ण रूप से द्विभाषी रूप में प्रस्‍तुत की जाती हैं।

राजभाषा नियम 1976 के नियम 5
राजभाषा नियम 1976 के नियम 5 के अंतर्गत हिंदी प्राप्‍त सभी प्रत्रों का उत्‍तर केवल हिंदी में दिया जाता है। इस संबंध में नियम का उल्‍लंघन रोकने में जांच बिंदु स्‍तर पर हिंदी में पत्र प्राप्‍त करने वाले अधिकारियों को ही जांच बिंदु बनाया गया है, जो पूरी तरह प्रभावी है।

राजभाषा नियम 1976 के  नियम 10(4)
संस्‍थान ने राजभाषा नियम 1976 के  नियम 10(4) के अंतर्गत 22 नवम्‍बर 1988 से अधिसूचित करने के लिए पात्रता प्राप्‍त कर ली थी । 

राजभाषा नियम 1976 के  नियम 8(4)
संस्‍थान में निदेशक कार्यालय का प्रशासनिक प्रधान होता है तथा राजभाषा नियम 1976 के  नियम 8(4) के अंतर्गत निदेशक महोदय के हस्‍ताक्षरों से समय-समय पर प्रवीणता प्राप्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों को व्‍यक्तिगत रूप से अपना विनिर्दिष्‍ट कार्य हिंदी में करने के आदेश जारी किए गए हैं।  इसका अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अनुभाग/विभाग अधिकारी को मनोनित किया गया है।  इसके अतिरिक्‍त, समय-समय पर वाणिज्‍य मंत्रालय तथा राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान इसकी समीक्षा की जाती है।
उपर्युक्‍त के अनुपालन में जारी किए गए आदेश निम्‍नानुसार हैं:
16 नवम्‍बर 2016
20 जुलाई 2015
21 अक्‍तुबर 2013

 राजभाषा नियम 1976 के  नियम 11
राजभाषा नियम 1976 के  नियम 11 के अंतर्गत संस्‍थान से संबंधित सभी कोड़ मैनुअल आदि द्विभाषी रूप में उपलब्‍ध हैं। इन सभी दस्‍तावेजों को द्विभाषी रूप में संस्‍थान की वेबसाइट www.iift.ac.in पर भी देखा जा सकता है जिसे समय-समय अद्यतन किया जाता है। उपर्युक्‍त से संबंधित दस्‍तावेजों का विवरण निम्‍न प्रकार है :

राजभाषा नियम 1976 के  नियम 11 के अंतर्गत संस्‍थान में सभी अधिकारियों द्वारा प्रयोग की जाने वाली रबड़ की मोहरें, साइन बोर्ड, सीलें पत्र शीर्ष, नाम पट्ट, विजिटिंग कार्ड आदि द्विभाषी रूप में उपलब्‍ध हैं । 

संस्‍थान द्वारा निर्धारित/प्रयोग में लाए जाने वाले मुद्रित फार्म अर्थात अवकाश आवेदन, भविष्य निधि, चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल, यात्रा रियायत बिल, वाहन व्यय इत्यादि प्रपत्र तथा शिक्षण कार्यक्रमों के दौरान उपयोग किए जाने वाले पंजीकरण प्रपत्र पूरी तरह हिंदी और अंग्रेजी में समान रूप से उपलब्ध हैं ।

राजभाषा नियम 1976 के  नियम 12
संस्‍थान में राजभाषा नियम 1976 के  नियम 12 के अंतर्गत संस्‍थान के प्रशासनिक प्रधान निदेशक महोदय द्वारा राजभाषा संबंधी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए विभागीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति की बैठकों के दौरान सभी अनुभागों के राजभाषा संबंधित कार्यों की समीक्षा की जाती है तथा इस संदर्भ में समय-समय पर आदेश जारी किए जाते हैं।

 वेबसाईट

संस्थान की द्विभाषी वेबसाईट - संस्थान की वेबसाईट हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है तथा समय-समय पर अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी वेबसाईट का न केवल अद्यतन किया जाता है अपितु इसे अधिकाधिक सूचनात्‍मक बनाने के लिए सतत प्रयास किए जाते हैं ।
www.iift.ac.in

यूनिकोड का उपयोग
संस्‍थान में उपलब्‍ध सभी कंप्‍यूटर यूनिकोड समर्थित हैं जिसका उपयोग कोलकाता परिसर सहित संस्‍थान के सभी संकाय सदस्‍यों व कर्मचारियों/अधिकारियों द्वारा कुशलता से किया जा रहा है।  समय-समय पर हिंदी कार्यशालाओं के आयोजन के दौरान संस्‍थान के सदस्‍यों को  हिंदी कार्यों के लिए  कंप्‍यूटर की उपयोगिता संबंधी जानकारी दी जाती है।  परिणामस्‍वरूप संस्‍थान के सभी सदस्‍यों द्वारा कंप्‍यूटर पर यूनिकोड को प्रयोग करते हुए हिंदी कार्य किए जाते हैं।

प्रोत्‍साहन योजना संस्‍थान में हिंदी में काम करने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों को प्रोत्‍साहन प्रदान करने के लिए छमाही प्रोत्‍साहन योजना चलाई जाती है। इस प्रोत्‍साहन योजना के अंतर्गत संस्‍थान का कार्य अधिकाधिक हिंदी में करने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों को शामिल किया जाता है जिन्‍हें राशि रू.1000/- का नगद पुरस्‍कार देकर प्रोत्‍साहित करने का प्रावधान है। हिंदी कार्य अर्थात नोटिंग, ड्राफ्टिंग के अलावा जो व्‍यक्ति अपना कार्य पूर्णत: हिंदी में करते हैं जैसे सेवा पुस्तिकाओं में इंदराज, चैक तथा बिल हिंदी में तैयार करना, डायरी डिस्‍पैच रजिस्‍टर में हिंदी का प्रयोग आदि शामिल किया जाता है।  पुरस्‍कार के पात्र केवल वही कर्मचारी होते हैं जिनके मूल रूप से हिंदी में किए गए कार्य की मात्रा छमाही में कम से कम 10,000 शब्‍द (लगभग 50 पृष्‍ठ) होती है। सभी अहिंदी भाषी कर्मचारियों को हिंदी में कार्य के मामले में 50 प्रतिशत की छूट का भी प्रावधान किया गया है। हिंदी में किए गए कार्य की जांच संस्‍थान में गठित तीन सदस्‍यीय समिति द्वारा की जाती है।
जनवरी-जून 2016

 हिंदी कार्यशालाएं
तिमाही हिंदी कार्यशालाएं - संस्थान में हिंदी कार्यशालाओं का नियमित रूप से आयोजन किया जाता है । ये कार्यशालाएं अधिकारियों/कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है ।  इन कार्याशालाओं में अति‍थि वक्‍ता के रूप में हिंदी जगत की जानी-मानी हस्तियों जैसे सेवानिवृत्‍त डॉ. नामवर सिंह, आचार्य, जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय,  डॉ. पूरनचंद टंडन, आचार्य, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय एवं निदेशक, अनुवाद परिषद, डॉ. सत्‍येन्‍द्र सिंह, केन्‍द्रीय अनुवाद ब्‍यूरो, श्री प्रेमसिंह, संयुक्‍त निदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग आदि को आमंत्रित किया गया है । सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कंप्‍यूटर पर अधिक से अधिक हिंदी कार्य करने व सूचना संबंधी अद्यतन जानकारियों के लिए समय-समय पर श्री केवल कृष्‍ण, वरिष्‍ठ तकनीकी निदेशक, राष्‍ट्रीय सूचना केन्‍द्र आदि को आमंत्रित किया गया है ।
हिंदी कार्यशालाओं के आयोजन की तिथि इस प्रकार हैं:-

  • जुलाई-सितम्‍बर 2016 (नया)
  • अप्रैल-जून 2016  
  • जनवरी-मार्च 2016        
  • अक्‍तुबर-‍दिसम्बर 2015  

तिमाही एवं वार्षिक रिपोर्ट संस्‍थान के संदर्भ में राजभाषा के प्रगामी-प्रयोग संबंधी तिमाही व वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर नियमित रूप से राजभाषा विभाग, गृह-मंत्रालय को निर्धारित अवधि में ऑन-लाईन तथा वाणिज्‍य मंत्रालय को प्रेषित की जाती है ।  उपर्युक्‍त भेजी गई रिपोर्टों को संक्षिप्‍त विवरण निम्‍नप्रकार है ।

  • जुलाई-सितम्‍बर 2016 (नया)
  • अप्रैल-जून 2016
  • जनवरी-मार्च 2016
  • अक्‍तुबर-‍दिसम्बर 2015  

तिमाही बैठकें

विभागीय तिमाही बैठकें – राजभाषा के नियमानुसार संस्‍थान में विभागीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति का गठन किया गया है ।  समिति के अध्‍यक्ष के रूप में संस्‍थान का प्रशासनिक प्रधान निदेशक महोदय है । इस प्रकार डॉ. सुरजित मित्रा, निदेशक, भारतीय विदेश व्‍यापार संस्‍थान समि‍ति के अध्‍यक्ष हैं ।  कोलकाता परसिर सहित सभी अधिकारी वरिष्‍ठ अधिकारी इस समिति के सदस्‍य हैं ।  संस्‍थान में निदेशक महोदय की अध्‍यक्षता में निर्बाध रूप से तिमाही बैठकें आयोजित की जाती हैं । बैठकों में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय तथा वाणिज्‍य मंत्रालय के प्रतिनिधि भी समिति सदस्‍य के रूप में आमंत्रित किए जाते हैं ।  निदेशक महोदय की अध्‍यक्षता व सभी सदस्‍यों की उपस्थिति में पिछली बैठक के कार्यवृत्‍त की समीक्षा तथा संस्‍थान में राजभाषा के प्रगामी – प्रयोग संबंधी निर्णय लिए जाते हैं । 

तिमाही बैठकों की कार्यसूची व कार्यवृत्‍त का विवरण निम्‍न प्रकार है :

  • जुलाई-सितम्‍बर 2016 (नया)
  • अप्रैल-जून 2016 (नया)
  • जनवरी-मार्च 2016
  • अक्‍तुबर-‍दिसम्बर 2015

नराकास की बैठकें संस्‍थान नगरीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति (नराकास) का सदस्‍य है ।  समय-समय पर नराकास की बैठकें आयोजित की जाती हैं तथा सदस्‍य के रूप में संस्‍थान की ओर से वरिष्‍ठ अधिकारी या हिंदी अधिकारी द्वारा उपस्थिति दर्ज की जाती है । इन बैठकों में राजभाषा संबंधी लिए गए निर्णयों पर संस्‍थान में की गई अनुवृत्ति कार्रवाई की रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में संबंधित अधिकारी को प्रेषित की जाती है । नराकास द्वारा सदस्‍य कार्यालयों के लिए कार्याशालाएं व प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं जिनमें संस्‍थान के अधिकारी/कर्मचारी अपनी सहभागिता दर्ज करते हैं ।  इसके अतिरिक्‍त संसथान के संदर्भ में मांगी गई सूचनाएं भी उपलब्‍ध कराई जाती हैं । नरकास द्वारा संस्‍थान के हिंदी अधिकारी को 7 सदस्‍य कार्यलयों की छमाही रिपोर्ट की समीक्षा के लिए नोडल अधिकारी के रूप में मनोनित किया गया है जिसका निर्वहन पूरी निष्‍ठा के साथ किया जाता है ।

नराकास को भेजी गई छमाही रिपोर्ट व अन्‍य सूचनाए इस प्रकार हैं :

अनुवृत्ति कार्रवाई

30 अगस्‍त 2016 - अनुवृत्ति कार्रवाई रिपोर्ट 30 सितम्‍बर 2015 - अनुवृत्ति कार्रवाई रिपोर्ट

 सलाहकार समिति की बैठकें – ये बैठकें माननीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री या वाणिज्‍य सचिव की अध्‍यक्षता में मंत्रालय में आयोजित की जाती हैं ।  वाणिज्‍य मंत्रालय के संबंद्ध कार्यालय इस समिति के सदस्‍य होते हैं, इस प्रकार संस्‍थान सलाहकार समिति का सदस्‍य है तथा समय-समय पर आयोजित इन बैठकों में संस्‍थान की ओर से सहभागिता दर्ज की जाती है । इन बैठकों में राजभाषा संबंधी लिए गए निर्णयों का संस्‍थान में भली-भांति कार्यान्‍वयन किया जाता है । 

सेवाकालीन प्रशिक्षणसंस्‍थान में राजभाषा नियमों के अनुसार सेवाकालीन प्रशिक्षण के अंतर्गत हिंदी टंकण के प्रशिक्षण का लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है तथा  सभी सफल प्रशिक्षणार्थियों को प्रोत्साहन के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ दिए गए हैं । इसी क्रम में हिंदी भाषा व हिंदी आशुलिपि प्रशिक्षण के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा करने के लिए प्रशिक्षण के लिए शेष कर्मचारियों को हिंदी शिक्षण योजना आर.के. पुरम कार्यालय के लिए नामित किया गया है । इस प्रकार संस्‍थान में सेवाकालीन प्रशिक्षण के लक्ष्‍य को शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा ।

हिंदी में प्रकाशन                   
हिंदी में प्रकाशन – राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के अंतर्गत प्रशासनिक शब्‍दावली तैयार कर मुद्रण कराते हुए संस्थान के अधिकारियों/कर्मचारियों के बीच वितरण की गई । संस्‍थान में प्रति वर्ष वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी किया जाता है।  वार्षिक रिपोर्टों का विवरण निम्‍नप्रकार है :

वार्षिक रिपोर्ट

हिंदी गृह-पत्रिका ’यज्ञ’
राजभाषा के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार को ध्‍यान में रखते हुए संस्‍थान के हिंदी अनुभाग द्वारा प्रति वर्ष  हिंदी गृह-पत्रिका ’यज्ञ’ का प्रकाशन किया जाता है ।  पत्रिका में संस्थान की मुख्य गतिविधियां तथा राजभाषा के नियमों  के अतिरिक्त आईआईएफटी परिवार अपने मन की बात कविता, कहानी, नाटक, निबंध, आदि के माध्यम से व्यक्त करता रहा है । इससे सृजनात्मकता को बढ़ावा मिलता है एवं  विचारों का आदान-प्रदान होता है । 
गृह-पत्रिका 'यज्ञ' अंक-9 वर्ष 2016
गृह-पत्रिका 'यज्ञ' अंक-8 वर्ष 2015
गृह-पत्रिका 'यज्ञ' अंक-7 वर्ष 2014
गृह-पत्रिका 'यज्ञ' अंक-6 वर्ष 2013

राजभाषा निरीक्षण
दिनांक 04  नवम्‍बर 2016 को क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन कार्यालय, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय से आए अधिकारियों ने संस्थान में राजभाषा कार्यों का निरीक्षण किया । अधिकारियों द्वारा संस्‍थान में राजभाषा के कार्यान्‍वयन को निर्धारित मानकों के अनुसार पाया तथा सराहना की गई । 
दिनांक 19 अक्‍तूबर 2016 को संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति द्वारा संस्‍थान के संदर्भ में निरीक्षण किया गया।  माननीय समिति सदस्‍यों ने संस्‍थान में राजभाषा के क्रियान्‍वयन की स्थिति संतोषजनक पाई।  संस्‍थान की ओर से इस बैठक में निदेशक महोदय डॉ एस. मित्रा ने भाग लिया । 
दिनांक 20 अगस्‍त 2015 को संसदीय राजभाषा समिति की आलेख एवं साक्ष्‍य उपसमिति द्वारा संस्‍थान के संदर्भ में विचार विमर्श किया गया।  माननीय समिति सदस्‍यों ने संस्‍थान में राजभाषा के क्रियान्‍वयन की स्थिति संतोषजनक पाई।  संस्‍थान की ओर से इस बैठक में निदेशक महोदय डॉ एस. मित्रा ने भाग लिया । 
05 मार्च 2015 को क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन कार्यालय, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय से आए अधिकारियों ने संस्थान में राजभाषा कार्यों का निरीक्षण किया । अधिकारियों द्वारा संस्‍थान में राजभाषा के कार्यान्‍वयन को निर्धारित मानकों के अनुसार पाया तथा सराहना की गई ।  निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार संबंधी दिए गए सभी सुझावों को पूरा किया गया ।

दिल्‍ली संस्‍थान पर हिंदी सप्‍ताह का आयोजन
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार आईआईएफटी दिल्ली में हर वर्ष हिंदी सप्‍ताह का आयोजन किया जाता है। राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार के लिए इस दौरान  निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी एवं हिंदी टिप्पण प्रारूपण जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।  निदेशक महोदय द्वारा प्रतियोगिता विजेताओं को नगद पुरस्कार व प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाता है।
हिंदी सप्‍ताह के अंतर्गत कार्यक्रमों की कड़ी में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है तथा इस दौरान समय-समय पर अनेक विख्‍यात कविगणों को आमंत्रित किया गया है।  हिंदी सप्‍ताह के समापन पर हर वर्ष सांस्कृति रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।

कोलकाता परिसर पर हिंदी सप्‍ताह का आयोजन

कोलकाता परिसर पर हिंदी सप्‍ताह - कोलकाता परिसर पर भी हर वर्ष हिंदी सप्‍ताह का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम का प्रारंभ शपथ ग्रहण समारोह के साथ किया जाता है जिसमें सभी सहभागी अर्थात संकाय सदस्य, अधिकारी तथा कर्मचारी अधिकाधिक राजकीय कार्य हिंदी में करने की शपथ लेते हैं। तदोपरांत अध्यक्ष महोदय डॉ. के. रंगराजन दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रमों का शुभ आरंभ कराते हैं। कार्यक्रमों की श्रृंखला में भाषण व कविता पाठ आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं तथा सहभागी विजेताओं को पुरस्कार के रूप में प्रमाण-पत्र व नगद राशि प्रदान की जाती है।